OFFLINE vs ONLINE COACHING !

आज से 10 साल पहले शायद हमारे विद्यार्थियों के पास इतनी सुविधाएं नहीं थी, भारत में इतना अधिक इंटरनेट का प्रयोग नहीं था। इसके कारण विद्यार्थियों को अपनी विद्या अर्जन करने के लिए दूर दूर जाना पड़ता था। समय बदला,  इंटरनेट की सुविधाएं सामने आई और धीरे धीरे ऑनलाइन कोचिंग पढ़ाई का दौर शुरू हुआ । आइए आज समझते हैं के विद्यार्थी के लिए क्या ऑनलाइन कोचिंग हे या ऑफलाइन कोचिंग जिसमें विद्यार्थी, जिसमें सीधा शिक्षक के पास जाकर पड़ता है उपयुक्त है।

इस बात पर विचार करने के लिए ,  हमें ऑनलाइन ओर ऑफलाइन के समस्त पहलुओं पर विचार करना पड़ेगा। परंतु इस विचार से पहले हम यह समझे कि हमारे विद्यार्थी के पास आज क्या नहीं है और क्या है? आज हमारे पहले से अधिक परिपक्व, बुद्धिमान और नए लक्ष्य प्राप्ति की  धारणा भी रखता है , लेकिन साथ में उनके पास समय का अभाव हो गया है। आज बच्चा अपने विद्यालय और कोचिंग के बाद, खेलकूद को भूल गया है, जोकि जीवन की सर्वांगीण विकास के लिए बहुत आवश्यक है। कुछ बच्चे सब कुछ त्याग कर मात्र पढ़ाई पर लग जाते हैं, वे शायद बहुत अधिक और अच्छे अंक प्राप्त भी कर ले परंतु उनके विकास में कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ कभी रह जाती है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि उन का विकास संपूर्ण नहीं हुआ परंतु कहीं ना कहीं उन्हें अपने जीवन के उन वर्षों का भाव या उनके उत्साह अभाव महसूस होता है।  कदाचित आपने सचिन राणा और कल्पित वेरावल के वीडियो यूट्यूब पर देखे होंगे, यह दोनों ही देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थान यानी आईआईटी मैं आज भी पढ़ते हैं। परंतु दोनों इस भ्रम को तोड़ने में लगे हुए हैं कि आप इच्छा से इंजीनीयरिंग की पढ़ाई करें किसी भी प्रकार के दबाव में आकर न करें।

मैं इन दोनों युवाओं का और ऐसी ही समस्त युवाओं को ऐसी सोच रखते हैं का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। यह दोनों और ऐसे ही अन्य लोग हमारे युवाओं को आज यथार्थ से परिचित करा रहे हैं। अच्छी पढ़ाई करके आईआईटी में आने मैं कोई बुराई नहीं है, अपितु आप देश और समाज के लिए बहुत अच्छा कर रहे हैं। लेकिन इसके चलते पिछले 10 वर्षों में हमारे समाज में अभिभावकों का रुझान जो बच्चों को एक विशेष प्रकार की पढ़ाई की तरफ ले जाता है, वह कहीं ना कहीं उनके लिए तनाव का कारण भी बनता है। हम देख रहे हैं क्या अपने परिणामों से हतोत्साहित आज युवा आत्महत्या जैसे कठोर कदम तक उठा लेते हैं। उनका नाम समाचार पत्रों में आता है, लेकिन कितने ही ऐसे हैं कुंठा से ग्रसित हैं लेकिन किसी को बोल नहीं पाते हैं। इसीलिए आज अभिभावकों और युवाओं में कुछ ऐसा प्रचलन भी हो रहा है जिसमें वह ऑनलाइन कोचिंग की तरफ बढ़ रहे हैं। इसी के साथ कच्ची उम्र के पड़ाव पर कई बार विध्यार्थी अकेलेपन का एहसास करता है और किसी अपने से कुछ बात करना चाहता है, ऐसे मे वह विध्यार्थी जो अपना घर बार  छोड कर कोटा इत्यादि नगरी में जाते हैं, उन्हे अपने आसपास अपने प्रतिद्वंदी ही मिलते है । तो उनका अकेलापन बहुत बढ़ जाता है और बहुधा उनकी शिक्षण व्यवस्था पर इसका दुष्प्रभाव भी पड़ने लगता है । अपने माता पिता के पास होते हुए बच्चे अधिक सुरक्षित अनुभव करते हैं ।           

ऐसे में  ऑनलाइन कोचिंग इसके 1 विकल्प के रूप में आया है जिसमें आपका समय बचता है। आइए अब दोनों कोचिंग को कुछ पहली उस पहलुओं से विचार करते हैं।  ऑनलाइन कोचिंग में सर्वप्रथम विद्यार्थी के पास समय है। जो बच्चे आज विद्यालय जाते हैं और भले ही,  अपने घर के पास ही जाते हैं उनको भी जाने से पहले आने की बात लगभग 1 घंटे का समय विश्राम के लिए अथवा दूसरे कार्यों के लिए चाहिए, कहने का तात्पर्य यह है की रोज़ के दो  घंटे उसके शिक्षा में काम नहीं आती। उसके उपरांत यदि शाम को किसी स्थान पर कोचिंग के लिए जाता है तो भी तैयार होने में, और उस कक्षा में पहुंचने तक वह विद्यार्थी कुछ सकारात्मक कार्य नहीं कर पा रहा। उसके बाद यदि किसी कारणवश, यदि वह एक कक्षा में अनुपस्थित हो जाता है, तो पाठ्यक्रम आगे बढ़ता जाता है। इसी कारण से वह अपनी अपने रोजमर्रा के कार्यक्रम में कहीं ना कहीं बंध भी जाता है ।

जबकि कोचिंग में अथवा यूट्यूब के चैनल से पढ़ने में उसके पास ऐसा व्यवधान नहीं है, क्योंकि यदि वह लाइव क्लास किसी तरह से छूट भी जाती है तो उसकी रिकॉर्डिंग दोबारा देख सकता है । इसके अतिरिक्त आने जाने का समय और भीड़भाड़ से बचाव,  आज के महानगरों पर जो उसे थका देता है उससे भी वह बच जाता है। तो यह तो रही ऑनलाइन कोचिंग थे होने की एक बात। मेरे अपने विध्यार्थी जब मैं नोएडा में राह कर कोचिंग करता था तो मात्र 8 किलोमीटर की दूरी वाले विध्यार्थी भी ऑनलाइन कक्षा में आते थे जब तक बहुत आवश्यक न हो । उसके उपरांत बड़े शहरों जहां यातायात का समय बहुत लगता है, कई बार शाम से आते आते बहुत देर हो जाती है । जबकि ऑनलाइन कक्षा आप देर शाम या रात को भी कर सकते हैं ।      

यही पर बात है यदि आप छोटे संस्थान में जाते हैं तो वहां शायद आप मासिक फीस भर सकते हैं, अथवा  किस्तों में भी  दे सकते हैं जिसके कारण यदि आप बीच में कोचिंग छोड़ देते हैं या आपको जाना बंद हो जाता है तो आप कोई दूसरा विकल्प भी सोच सकते हैं। परंतु बड़े बड़े कोचिंग संस्थानों में आप से धन एकमुश्त और सब पहले ले लिया जाता है । इसे में कि कई बार जब विद्यार्थी की अभिभावक फीस भर देते हैं, अपने अभिभावकों को कह नहीं पाता कि मेरा इस कोचिंग संस्थान में बहुत अधिक लाभ नहीं हो रहा। और एक साल तक उसी स्थान पर जाता रहता है जहां पर उसका अधिक लाभ नहीं हो रहा। अभिभावक यह समझते हैं कि हमने धन दिया हुआ है, धन से अधिक विद्यार्थी के समय का नुकसान हो रहा है। जबकि यह सुविधा आपको ऑनलाइन कोचिंग में अवश्य है क्या आप कभी भी कहीं भी पढ़ सकें  ।

आप एक और बात पर चर्चा करें, जो बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान है जहां पर आपको सभी विषयों की कोचिंग दी जाती है मतलब यदि आप जेईई की तैयारी करते हैं तो आपको वहां पर भौतिक शास्त्र रसायन शास्त्र और गणित पढ़ना पड़ता है, और यदि आप एनईईटी  की तैयारी कर रहे हैं आपको वहां पर भौतिक शास्त्र रसायन शास्त्र और जीव विज्ञान का अध्ययन करना पड़ता है । अब जितने भी बड़े संस्थान है, उनका सबसे अधिक ध्यान इस बात पर है कि अच्छे  विद्यार्थियों को उच्चतम अंक दिलवाना है, और  बाकी सब तो भीड़ का हिस्सा बन कर रह जाते हैं । कभी-कभी आप समूह मैं एक ऐसे गुरुजन से पढ़ते हैं जिनसे आपको विषय रुचिकर लगता है, बाकी विषय आपको समूह  में नीरस से लगते हैं तो आप कुछ नहीं कर सकते। मैं किसी भी गुरु को गलत नहीं बता रहा पारन्तु हरेक के पढ़ाने का अलग अलग ढंग है । आपको कौन से गुरु अधिक लाभ दिलवा  सकते है इसका निर्णय केवल विध्यार्थी कर सकता है । परंतु बड़े संस्थानों में आपको विकल्प नहीं मिलता है । कम से कम यूट्यूब चैनल पर यह सुविधा उपलब्ध है कि अप एक से अधिक अध्यापकों को देख सकते हैं । सभी अध्यापक अच्छे है और आपके लिए मेहनत करते है परंतु जिसकी शैली आपको पसंद आए वही आप केलिए ठीक रहेगा । कोचिंग सेंटर का एक लाभ यह भी है कि उनकी अनुक्रमणीका से ही वह चलेंगे और आपको पुस्तकें भी देंगे जिनमें कर अध्याय पर कुछ चुने प्रश्न होंगे । यह आपको यू ट्यूब पर कम मिलेगी ।

तो आप यह मान सकते हैं ए कोचिंग संस्थान में जाने से आपका समय अधिक लग सकता है यातायात के कारण और कई बार आपको एक ही स्थान पर तीनों विषय सकते हैं जो आपकी रुचि में नहीं है। उसकी अतिरिक्त यदि आप किसी कारणवश अनुपस्थित हो जाते हैं उस समय की पढ़ाई आप जाती है

अब तो क्या यह समझे कि यूट्यूब चैनल से पढ़ाई बहुत बेहतर है, तो यह भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि इस प्रकार की कोचिंग में भी कुछ खामियां है। परंतु आप अपने सही ढंग से उन कमियों को कम तो कर ही सकते है, यदि पूर्णतया निर्मूल नहीं कर सकते है । 

आईए अब इसकी कुछ कमियों को कुछ उजागर करते हैं। पहली बात कुछ विद्यार्थी अपने स्वभाव से जब तक किसी कक्षा में ना हो अपने आप पढ़ने को गंभीरता से नहीं लेते हैं , उनके लिए ऑनलाइन कोचिंग बहुत फायदेमंद नहीं है। इसके उपरांत यह भी सत्य है जब आप कक्षा में जाते हैं तो पीठ सीधी करके और न चाहते हुए भी आपको कुछ हद तक वहां पर ध्यान केन्द्रित करना ही पड़ता है। दूसरी कमी ऑनलाइन में है कि समय-समय पर कोचिंग संस्थान आपके कुछ परीक्षाएँ लेते रहते हैं जिनसे आपकी कमियां पता लगती रहती है। जब आप अपने आप पढ़ते हैं तो अधिकांश इस  प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त जब आप आराम से वीडियो देखते हैं, आपके पास जो सुविधा उपलब्ध है आप उसे बार-बार देख सकते हैं तो शायद विद्यार्थी पहली बार ध्यान केन्द्रित नहीं करते  ऐसी विद्यार्थियों की समय की बचत का कोई अधिक लाभ नहीं रहता । और एक बात कि जब आप कक्षा में होते हैं जो कुछ पढ़ाया जाता है उसको आप अपनी कॉपी मे लिखते रहते हैं । जबकि ऑनलाइन यूट्यूब में पढ़ते हुए आप क्योंकि मन के किस किसी कोने में यह बात आपको पता है दोबारा भी देख सकते हैं इसलिए यह भी रह जाता है ।

अब आप अंत में समझें कि ऑनलाइन कक्षाएं स्वप्रेरित विद्यार्थी के लिए तो बहुत अच्छा विकल्प है यही पर एक बात आपको और समझ नहीं है कि आप यूट्यूब कोचिंग की लाइव क्लास में भी बहुत अधिक प्रश्न नहीं पूछ सकते क्योंकि यदि अध्यापक आपको बताता रहेगा तो औरों के साथ अन्याय करेगा और नही करेगा आपके साथ । यह कुछ उनकी मजबूरी भी हैं ।

तो आप कुछ विशेष बातों का ध्यान रखें तो ऑनलाइन कोचिंग आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है । पहली बात जब भी क्लास लें तो उसे इस प्रकार की गंभीरता से रखें कि आपको उसे बार बार नहीं देखना है । साथ में ही बैठ कर अपनी कॉपी पर आप महत्वपूर्ण अंश लिखते रहें यह समझ के  कि आपको अगर कुछ अंश दोबारा से पढ़ना  रहेगा तो इसी कॉपी से पढ़ेंगे । पहले दो तीन अध्यापक देख लें फिर जिसकी शैली में आपको समझ आ जाए, हर बार उसे ही सुने । इससे यह होगा कि यदि आपको कुचच्ह समझ ना भी आए तो उनकी के कमेंट बॉक्स में आप संशय पूछ भी सकते हैं । अब रह गया आपकी परीक्षाएँ और आपको कुछ प्रश्न भी मिलें ।    

मैंने अपने व्यक्तिगत कोचिंग में इसीलिए, कुछ प्रावधान किया है कि मैं यू ट्यूब चैनल पर विडियो के साथ ही एक दो दिन के अंतराल पर अपनी वैबसाइट पर नोट्स डाल देता हूँ । इसके साथ ही कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न भी जिन्हे अब मैं अपनी विडियो डालने से पहले अथवा लाइव कक्षा से पहले वैबसाइट पर डाल दूंगा जिससे आप लोग उसे एक दिन पहले देख लें और उनको अगली कक्षा में यू ट्यूब पर देख लें । इसक्के अतिरिक्त मैं अपना एक अलग प्लेटफॉर्म रखा है जहां पर आकार आप परीक्षाएँ भी दे सकते हैं । इसके अतिरिक्त यदि आपको स्वयं से कुछ शंका रह जाये तो आप मुझे संपर्क करके मुझसे व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन कक्षाएं ले सकते हैं । जिसमें मात्र मैं आप के साथ 40 मिनट के लिए उपलब्ध हो जाता हूँ । इन दो से मैंने अपनी कोचिंग मे कुछ  खामियों को कम करने का प्रयास अवश्य किया है । पर अंत मे  यदि आपको अपने आसपास अच्छे अध्यापक जिनसे आपको समझ आ जाए मिल जाएँ तो अच्छी   कोई बात नहीं । गुरु के सीध संपर्क का कोई मुक़ाबला न है न रहेगा ।            

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